बाजार का मिजाज बदलने मे वक्त नहीं लगता। जरा सी परिस्थितियों में बदलाव होते ही बाजार बदल जाता है। सूचना तकनीक (आईटी) उद्योग को ही ले लीजिए। कोविड के समय यह उद्योग आसमान पर था।

लेकिन इन दिनों सूचना तकनीक आईटी उद्योग को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। बड़े आर्डर लेने के लिए कंपनियां ग्राहकों की कड़ी से कड़ी शर्त मानने को भी मजबूर हो रही है।

लॉकडाउन व सामाजिक दूरी की वजह से हर कोई आईटी पर निर्भर हो गया था। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में एक बड़ा उछाल देखने को मिला था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही है। जैसे ही कोविड महामारी कंट्रोल में आई, और दफ्तर में स्टाफ आना शुरू हुआ तो आईटी क्षेत्र में इसका असर साफ नजर आने लगा। हाल की तिमाहियों के नतीजों से पता चल रहा है कि आईडी उद्योग मुश्किल के दौर में हैं।

मुद्रास्फीति के दबाव और मंदी की आशंकाओं के चलते उपभोक्ताओं ने अपनी प्राथमिकता बदल दी है। उपभोक्ता अब आईटी कंपनियों को इस तरह की शर्त मानने पर मजबूर कर रहा है, जिसे पूरा करना उनके लिए चुनौती हो रहा है। मसलन न्यूनतम लागत बचत की गारंटी मांगना। लक्ष्य निर्धारित करना, और भुगतान तभी करना जब लक्ष्य प्राप्त हो जाए। लागत में वृद्धि की समीक्षा करना।

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आईटी में जो स्थिति है, वह किसी भी उद्योग में आ सकती है। एक समय मांग इतनी ज्यादा हो जाए, लेकिन जैसे ही हालात में थोड़ा बदलाव हो तो मांग में कमी आ जाए कि बाजार में टिका रहना मुश्किल हो जाए। ऐसा प्लाइवुड में हो भी चुका है।

बाजार में आ रहे बदलाव पर पैनी नजर बनाए रखना जरूरी हैं। बाजार में यदि उछाल या मंदी है तो उन वजहों की पहचान करना बेहद जरूरी है। इससे यह पता चल सकता है कि उछाल या मंदी तात्कालिक है, या लंबे समय तक रहने वाला है।

कोई उत्पाद यदि बाजार में ब्रांड के तौर पर खुद को स्थापित कर लेता है तो अपनी ब्रांड वेल्यू की ताकत से कठिन हालात में भी आसानी से निकल सकता है। क्योंकि तब उपभोक्ता में उसका नाम उसकी सबसे बड़ी मजबूती बन जाता है।


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