डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने ’’28 सितंबर 2026’’ को केस संख्या ’’AD (OI) 35/2025’’ में अपने अंतिम निष्कर्ष जारी करते हुए चीन PR से आयातित मेलामाइन पर पांच वर्षों के लिए निश्चित एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है। प्रस्तावित ड्यूटी ’’US$ 245 से US$ 403 प्रति MT’’ के बीच है, जो संदकमक चतपबम का लगभग ’’25-42%’’ है। यह जांच भारत की एकमात्र घरेलू मेलामाइन उत्पादक कंपनी “Gujarat State Fertilizers and Chemicals Ltd. (GSFC)” के आवेदन पर शुरू की गई थी।

FIPPI के लिए अपने आवेदन में ’’वसुधा सिंह, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट’’ ने कहा कि अंतिम निष्कर्षों में ’’कानूनी और तथ्यात्मक कमियां’’ हैं तथा चोट (Injury) का निर्धारण स्वयं प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से पर्याप्त रूप से समर्थित नहीं है।

प्रमुख कानूनी चिंताएं

सबसे प्रमुख चिंता ’’आवश्यक तथ्यों के खुलासा न किए जाने’’ को लेकर है, विशेष रूप से सटीक Normal Value] Export Price] Dumping Margin और Non-Injurious Price (NIP) के संबंध में। मेलामाइन से संबंधित “Century Plyboards” मामले में गौहाटी हाई कोर्ट के पूर्व निर्णयों में माना गया था कि ऐसे आवश्यक आंकड़ों को Anti-Dumping Rules के “Rules 7 और 16’’ के तहत पूरी तरह गोपनीय नहीं रखा जा सकता। बाद की कानूनी कार्यवाहियों में भी इस स्थिति को नहीं बदला गया।

’’ Normal Value के निर्धारण’’ पर भी सवाल उठता है। Annexure I के Paragraph 7 के तहत प्राधिकरण को वैकल्पिक पद्धति अपनाने से पहले किसी market-economy third country के आंकड़ों पर विचार करना आवश्यक है। प्राधिकरण ने third-country data interested parties द्वारा उपलब्ध नहीं कराए जाने के आधार पर residual method अपना लिया, जबकि उपयुक्त आंकड़ों की जांच करने का दायित्व प्राधिकरण का है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा “Objective Examination और Non-Attribution” का है। Chinese imports के अलावा अन्य कारकों-जैसे वैश्विक कीमतों में गिरावट, Plants I और II का बंद होना, GSFC की export strategy में बदलाव और third countries से होने वाले imports - का पर्याप्त मात्रात्मक आकलन नहीं किया गया और न ही उन्हें China PR से कथित चोट से पर्याप्त रूप से अलग किया गया।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा ’’ Objective Examination और “Public Interest” के पहलू पर भी सवाल हैं। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में Chinese Melamine पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी नहीं लगाने का निर्णय लिया था। इसके अलावा, “Customs Notification No-. 12/2026’’ के माध्यम से Melamine value chain के कई inputs पर customs duty को शून्य कर दिया गया था। व्यापक public interest का आकलन करते समय इन नीतिगत निर्णयों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था।

प्राधिकरण के अपने आंकड़ों से ही सवाल उठते है

“Price undercutting नकारात्मक था’’, फिर भी प्राधिकरण ने अपने निष्कर्ष को price depression पर आधारित किया। प्राधिकरण के अपने आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में GSFC की कीमत लगभग ’’₹1,04,200 प्रति MT’’ थी, जबकि imported product का landed price’’₹1,15,559 प्रति MT’’ था। यानी GSFC की कीमत imports से नीचे थी। ऐसे में यह स्थापित करना कठिन है कि Chinese imports ने घरेलू कीमतों को नीचे दबाया।

2022-23 के बाद GSFC की selling price में ’’22% की गिरावट’’ आई, जबकि उसकी cost of sales में ’’21% की गिरावट’’ आई। इसी अवधि में subject imports में ’’51% की वृद्धि’’ हुई। आलोचना के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि GSFC की कीमतों में बदलाव मुख्य रूप से उसकी अपनी लागत के अनुरूप हुआ, न कि imports के कारण।

Normal Value’’₹85,430-93,973 प्रति MT’’ बताई गई है, जबकि जांच अवधि में GSFC की cost of sales लगभग ’’₹88,200 प्रति MT’’ थी। तर्क यह दिया गया है कि Normal Value स्वयं घरेलू उद्योग की लागत के काफी करीब है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या dumping, price injury और causation स्थापित करने के लिए मूलतः एक ही price comparison का इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्षमता और Residual Duty

GSFC के “Plant III ने 42,452 MT’’ उत्पादन किया, जो उसकी ’’40,000 MT” की rated capacity” से अधिक है। Chinese imports में हुई वृद्धि का लगभग ’’तीन-पांचवां हिस्सा’’ demand में वृद्धि और third-country imports में गिरावट से समझाया जा सकता है।

प्रस्तावित ’’US$ 403 प्रति MT की residual duty भी एक प्रमुख चिंता है। ’’US$ 1,100-1,200 प्रति MT’’ की Non-Injurious Price के मुकाबले यह duty non-cooperating producers के लिए केवल ’’US$ 697दृ797 प्रति MT’’ का landed price मानती हुई दिखाई देती है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन imports का landed price लगभग ’’US$ 964-1,011 प्रति MT’’ था। ऐसे में injury margin केवल लगभग ’’US$ 89-236 प्रति MT’’ बनता है।

लगभग ’’85,000 MT प्रति वर्ष’’ के import volume के आधार पर यह अंतर करीब ’’₹122-229 करोड़ प्रति वर्ष’’ का हो सकता है।

निष्कर्ष

निष्कर्ष यह निकलता है कि ’’एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य unfair trade से निपटना है’’, न कि किसी घरेलू उत्पादक को सामान्य प्रतिस्पर्धा या उसकी अपनी cost structure के परिणामों से बचाना।

इसमें भारत की trade-remedy proceedings में अधिक ’’पारदर्शिता, आवश्यक तथ्यों का खुलासा, injury और causation का objective assessment, अन्य प्रभावकारी कारकों का उचित आकलन और मजबूत public-interest analysis” की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

मुख्य चिंता यह है कि सही कॉम्पिटिशन को फिर से शुरू करने के लिए बनाया गया कोई कदम, अगर सही नतीजों पर आधारित न हो, तो इसके बजाय कॉम्पिटिशन को कम कर सकता है और डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज़ और आखिर में कंज्यूमर्स पर काफी खर्च ला सकता है।