’’देहरादून, 23 सितंबर 2026:’’ फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) डीम्ड यूनिवर्सिटी, देहरादून के वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी बैच 1998-2000 के पूर्व छात्रों ने 23 सितंबर 2026 को अपने शिक्षण संस्थान का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों के साथ वुड साइंस, अनुसंधान तथा लकड़ी उद्योग के भविष्य को लेकर सार्थक चर्चा की।

पूर्व छात्रों ने ’’डॉ. दिनेश कुमार, डीन एकेडमिक्स’’ से मुलाकात की और वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी की भविष्य की संभावनाओं, छात्रों के प्लेसमेंट, उद्योग-शैक्षणिक संस्थान सहयोग तथा पाठ्यक्रम में आवश्यक गतिशील बदलावों पर चर्चा की। इस बात पर जोर दिया गया कि पाठ्यक्रम को अधिक उद्योग-केंद्रित बनाया जाए तथा इसे उभरती तकनीकों और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए।

इसके बाद पूर्व छात्रों ने ’’श्री डी. पी. खली, हेड ऑफ वुड डिवीजन एवं साइंटिस्ट-G’’ के साथ नई अनुसंधान संभावनाओं, नवीन तकनीकों तथा लकड़ी और टिम्बर क्षेत्र के लिए उद्योग-केंद्रित समाधानों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में वैज्ञानिकों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के पेशेवरों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

डॉ. खली के साथ पूर्व छात्रों ने ’’जाइलैरियम (वुड म्यूजियम), एंटोमोलॉजी म्यूजियम और सिल्वीकल्चर म्यूजियम’’ का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने FRI की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत तथा वानिकी और वुड साइंस के क्षेत्र में इसके योगदान को फिर से करीब से देखा।

पूर्व छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में ’’श्री आर. बी. सिंह’’, वुड इंडस्ट्रियलिस्ट, मानेसर/गुरुग्राम; ’’श्री राकेश कुमार’’, वुड टेक्नोलॉजिस्ट एवं टिम्बर ट्रेडर, दक्षिण अफ्रीका; ’’श्री गजेंद्र राजपूत’’, वुड इंडस्ट्रियलिस्ट एवं अध्यक्ष, वुड एसोसिएशन; ’’श्री गजेंद्र सिंह’’, वुड इंडस्ट्रियलिस्ट एवं कंसल्टेंट; तथा ’’श्री विकास सिंह बघेल’’, वुड टेक्नोलॉजिस्ट एवं वर्तमान में GST अधिकारी शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने ’’डॉ. शैलेंद्र कुमार’’, साइंटिस्ट एवं हेड ऑफ वुड सीजनिंग; ’’डॉ. रंजना यादव’’, साइंटिस्ट; तथा ’’श्री पुरुषोत्तम कुमार’’, कोऑर्डिनेटर, वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी से भी बातचीत की।

चर्चा में छात्रों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया, जिनमें ’’पाठ्यक्रम विकास, प्लेसमेंट, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग समन्वय’’ प्रमुख रहे। पूर्व छात्रों ने अपने पेशेवर अनुभव साझा किए और अकादमिक शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा व्यावहारिक औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की आवश्यकता पर सुझाव दिए।

यह दौरा अत्यंत उपयोगी और सार्थक रहा तथा इसने वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी के विकास में योगदान देने और ’’उद्योग-शिक्षा-अनुसंधान के बीच मजबूत समन्वय’’ स्थापित करने के प्रति पूर्व छात्रों की प्रतिबद्धता को फिर से रेखांकित किया।